Phere lete samay kevalgyan kısko hua?
Answer
यदि आप शत्रुंजय तीर्थ की परिक्रमा/“फेरे” की बात कर रहे हैं, तो जैन परंपरा में
पुंडरीक स्वामी का नाम आता है। शत्रुंजय से संबंधित ग्रंथों में उन्हें वहीं सिद्धि/मोक्ष प्राप्त करने वाला बताया गया है। (
jainqq.org)
Explanation
शत्रुंजय महात्म्य में लिखा है कि भगवान आदिनाथ ने पुंडरीक स्वामी को बताया था कि वे इस तीर्थ पर केवलज्ञान और मोक्ष प्राप्त करेंगे, और आगे चलकर पुंडरीक स्वामी ने वहीं सिद्धि पाई। (
jainqq.org)
Takeaway
इसलिए “फेरे लेते समय केवलज्ञान किसको हुआ?” का सामान्य जैन उत्तर
पुंडरीक स्वामी माना जाता है। (
jainqq.org)