जैन कथा के अनुसार, ईर्ष्या के कारण स्वाध्यायी मुनि पीठ और महापीठ को अगले भव में स्त्री अवतार मिला। ( jahajmandir.com)
Explanation
कथा में बताया गया है कि ईर्ष्यायुक्त भाव के कारण उनके द्वारा स्त्रीवेद का बंध हुआ, और उसी के फलस्वरूप उन्हें अगले जन्म में स्त्री भव प्राप्त हुआ। ( jainqq.org)
Takeaway
जैन दृष्टि में ईर्ष्या, द्वेष और दूसरों के गुणों से असहज होना आत्मा के लिए हानिकारक माने जाते हैं। ( jahajmandir.com)