अगर आप केवलज्ञान की बात कर रहे हैं, तो यह एक ही पूर्ण अवस्था मानी जाती है।
राजीमती के प्रसंग में सामान्य जैन कथाओं में केवलज्ञान का अलग से उल्लेख नहीं मिलता; श्वेताम्बर परंपरा में वे साध्वी बनीं और उसी दिन मुक्ति प्राप्त हुई, जबकि दिगम्बर परंपरा में उनका पुनर्जन्म पुरुष देव के रूप में बताया गया है। ( jainpedia.org)
Explanation
जैन दर्शन में केवलज्ञान को पूर्ण, अखंड और सर्वोच्च ज्ञान कहा गया है। इसे अलग-अलग चरणों में बाँटकर नहीं देखा जाता। राजीमती की कथा का मुख्य संदेश वैराग्य, संयम और शील है। ( jainworld.jainworld.com)
Takeaway
संक्षेप में: केवलज्ञान एक है, और राजीमती के लिए सामान्य परंपरा में केवलज्ञान की अलग अवस्था नहीं बताई जाती। ( jainworld.jainworld.com)