जैन परंपरा की एक प्रचलित कथा के अनुसार, ब्रह्मी का पूर्वभव नाम पीठ और सुंदरी का पूर्वभव नाम महापीठ था। यह विवरण वज्रनाभ चक्रवर्ती के भव्य जीवन-संबंधी कथा में मिलता है। ब्रह्मी और सुंदरी भगवान ऋषभनाथ की पुत्रियाँ मानी जाती हैं। ( jintirthdarshan.blogspot.com)
Explanation
अलग-अलग जैन कथा-संकलनों में कुछ विवरण थोड़े अलग मिल सकते हैं, लेकिन इस लोकप्रिय कथानक में यही नाम बताए गए हैं। इसलिए “ब्रह्मी-सुंदरी के पूर्वभव के नाम” पूछने पर उत्तर सामान्यतः पीठ और महापीठ ही दिया जाता है। ( jintirthdarshan.blogspot.com)
Spiritual Understanding
ब्रह्मी और सुंदरी की कथा जैन धर्म में यह संदेश देती है कि जीव अनेक जन्मों में अपनी कर्म-परंपरा के अनुसार अलग-अलग रूप धारण करता है, और अंततः धर्म, वैराग्य और साधना से ऊँची आत्मिक स्थिति प्राप्त कर सकता है। ( jainpedia.org)