Prayashit ke kitne swasosawas hote hai?
Answer
प्रायश्चित्त के
एक ही निश्चित स्वासोश्वास नहीं होते। यह
दोष और प्रायश्चित्त के प्रकार के अनुसार बदलते हैं। जैन परंपरा में कायोत्सर्ग-प्रायश्चित्त के लिए
8, 25, 27, 50, 100, 108, 300, 500 और 1008 स्वासोश्वास तक के प्रमाण मिलते हैं। (
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Explanation
उदाहरण के लिए:
- हल्के अपशकुन या विशेष स्थिति में 8 स्वासोश्वास
- कुछ दोषों में 25 या 27 स्वासोश्वास
- कुछ प्रायश्चित्तों में 50 या 100 स्वासोश्वास
- महाव्रत-खंडन या संबंधित स्थितियों में 108 स्वासोश्वास
- दैवसिक, रात्रिक, पाक्षिक, चौमासी और सांवत्सरिक प्रतिक्रमण में क्रमशः 100, 50, 300, 500, 1008 स्वासोश्वास बताए गए हैं। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
जैन धर्म में प्रायश्चित्त का उद्देश्य केवल दंड नहीं, बल्कि
आत्मशुद्धि, पश्चात्ताप और दोष-निवारण है। इसलिए स्वासोश्वास की संख्या दोष की गंभीरता के अनुसार रखी जाती है। (
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Takeaway
संक्षेप में:
प्रायश्चित्त के स्वासोश्वास 108 ही नहीं, अनेक प्रकार के होते हैं; सही संख्या अपराध और विधि पर निर्भर करती है। (
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