परंपरागत रूप से एक लोगस्स सूत्र को लगभग 25 श्वासोच्छ्वास में पूरा माना जाता है। ( jainqq.org)
Explanation
कुछ Jain परंपराओं में काउस्सग के समय लोगस्स को सांसों के साथ जोड़कर किया जाता है, इसलिए इसे “लगभग 25 breaths” के रूप में बताया जाता है। उच्चारण की गति के अनुसार थोड़ा फर्क हो सकता है। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
इस गणना का उद्देश्य सांस, मन और ध्यान को एकाग्र करना है, ताकि लोगस्स का पाठ केवल बोलने का नहीं, बल्कि भक्ति और कायोत्सर्ग का साधन बने। ( jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में: लोगस्स = लगभग 25 स्वासोच्छ्वास। ( jainqq.org)