Kiske uday se jeev gati,jati,sharir aadi paryao ko prapt karta hai
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Answer
जीव नामकर्म के उदय से गति, जाति, शरीर, अंगोपांग, बंधन, संघात, संस्थान आदि पर्यायों को प्राप्त करता है।Explanation
जैन दर्शन में कर्मों के अलग-अलग कार्य माने गए हैं। उनमें से नामकर्म का कार्य जीव को शरीर और उससे संबंधित विविध रूप-रचना प्रदान करना है।इसलिए:
- गति — नरक, तिर्यंच, मनुष्य, देव
- जाति
- शरीर
- अंगोपांग
- और अन्य संबंधित रूप-विशेष
ये सब नामकर्म के उदय से प्राप्त होते हैं।