Kis gati me haiya,gyai or upadai ke bare me chintan manan karne ki shakti. Hoti hai
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Answer
यह शक्ति मुख्यतः मनुष्य गति में होती है। जैन परंपरा में हेय (त्याज्य), ज्ञेय (जानने योग्य) और उपादेय (ग्रहण करने योग्य) का विवेक कर पाना आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक प्रगति से जुड़ा हुआ माना गया है। केवल मनुष्य ही ऐसी ऊँची साधना और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ सकता है। ( jainworld.jainworld.com)Explanation
सरल भाषा में:- हेय = जिसे छोड़ना है
- ज्ञेय = जिसे समझना है
- उपादेय = जिसे अपनाना है
इस प्रकार का विवेकपूर्ण चिंतन सबसे अधिक मानव जीवन में संभव माना गया है, क्योंकि मनुष्य में ही आत्म-जागरूकता, निर्णय-शक्ति और साधना की क्षमता पूर्ण रूप से विकसित होती है। ( jainworld.jainworld.com)