“25 बोल” या “पच्चीस बोल” जैन तत्त्वज्ञान को समझने का एक संक्षिप्त ढांचा है, जिसमें 25 मूल वर्गीकरण या आधारभूत बातें समझाई जाती हैं। जैन परंपरा में “darshan” का सामान्य अर्थ “सम्यक दर्शन” यानी Right Faith भी होता है, जो सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र के साथ मोक्षमार्ग का प्रमुख अंग है। ( jaingpt.org)
Explanation
पच्चीस बोल का उद्देश्य जैन साहित्य और तत्त्वज्ञान को सरल बनाना है। इसमें जीव-अजीव, गति, जाति, काय आदि के माध्यम से वास्तविकता को वर्गीकृत करके समझाया जाता है, ताकि साधक मूल सिद्धांतों को क्रम से सीख सके। जैन परंपरा में ऐसी वर्गीकरण-आधारित शिक्षा को तत्त्वज्ञान की नींव माना गया है। ( jainstudy.wordpress.com)
Spiritual Understanding
जैन दृष्टि में सही समझ का आरंभ “सम्यक दर्शन” से होता है। जब दृष्टि शुद्ध होती है, तब ज्ञान और आचरण भी शुद्ध होने लगते हैं। इसलिए 25 बोल का अध्ययन केवल जानकारी नहीं, बल्कि आत्म-उन्नति की तैयारी है। ( jainknowledge.com)
Takeaway
संक्षेप में, “25 बोल” जैन तत्त्वज्ञान की मूल समझ है, और “darshan” से यहाँ प्रायः “सम्यक दर्शन” का भाव लिया जाता है। अगर आप किसी विशेष पाठ, पुस्तक, या पूजा-प्रयोग के संदर्भ में “25 बोल ke darshan” कह रहे थे, तो सामान्य जैन अर्थ यही निकलेगा। ( jaingpt.org)