तुंग्य नगरी के ऐसे श्रावक जिन का वर्णन भगवती सूत्र में आता है
उत्तर
भगवती सूत्र के
तुंगिका/तुंग्य नगरी वाले प्रसंग में
श्रावकों के व्यक्तिगत नाम नहीं दिए गए हैं। वहाँ केवल
“बहवे श्रमणोपासका” कहकर उस नगर के अनेक श्रमणोपासकों का सामूहिक वर्णन किया गया है। (
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विवरण
उस वर्णन में उनके जीवन की विशेषताएँ बताई गई हैं—वे धन-धान्य से संपन्न थे, बड़े-बड़े भवन, वाहन, दास-दासी, पशु-सम्पत्ति आदि से युक्त थे; साथ ही वे जीव-अजीव, आस्रव-संवर-निर्जरा, बंध-मोक्ष आदि तत्त्वों को जानते थे, निर्ग्रन्थ प्रवचन में दृढ़ श्रद्धावाले थे, पौषध, व्रत, प्रत्याख्यान और तप का पालन करते थे। (
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स्पष्टता
यदि आप
नाम सहित वर्णित प्रसिद्ध श्रावकों की बात कर रहे हैं, तो भगवती सूत्र में
शंख और पुष्कली का प्रसंग मिलता है, लेकिन वह
श्रावस्ती नगर का प्रसंग है, तुंगिका का नहीं। (
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निष्कर्ष
इसलिए तुंगिका नगर के प्रसंग के लिए सही उत्तर है:
“उनका सामूहिक वर्णन है, व्यक्तिगत नाम नहीं।” (
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