ग्रैवेयक जैन ब्रह्मांड रचना में ऊर्ध्व लोक के देव-निवास स्थान हैं। इसलिए सामान्य रूप से इन्हें देवलोक या स्वर्गीय लोक कहा जाता है।
Spiritual Understanding
जैन दृष्टि में ये उच्च पुण्य के फल से प्राप्त होने वाले दिव्य स्थान हैं, लेकिन मोक्ष नहीं हैं। आत्मा का अंतिम लक्ष्य इन लोकों में रहना नहीं, बल्कि कर्मों से पूर्ण मुक्ति पाना है।