25 bol ke 21v bol me manushya shetra ka vistaar varnan
Answer
25 बोल के 21वें बोल में मनुष्य क्षेत्र का अर्थ और उसका विस्तार सामान्यतः मध्यलोक में मनुष्यों के रहने-योग्य क्षेत्र से लिया जाता है। जैन भूगोल के अनुसार मनुष्य जन्म मुख्यतः जम्बूद्वीप, धातकीखण्ड और आधे पुष्करवर द्वीप में माना गया है।Explanation
जैन दृष्टि से संसार को ऊर्ध्वलोक, मध्यलोक और अधोलोक में बाँटा गया है। मनुष्य क्षेत्र केवल मध्यलोक का वह भाग है जहाँ मनुष्य जीवन संभव है।मुख्य रूप से:
- जम्बूद्वीप में मनुष्य क्षेत्र
- धातकीखण्ड में मनुष्य क्षेत्र
- आधे पुष्करवर द्वीप में मनुष्य क्षेत्र
यहाँ मनुष्य के जन्म, जीवन और धर्म-साधना की संभावना मानी गई है। जैन ग्रंथों में मनुष्य क्षेत्र का वर्णन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मानव जीवन ही मोक्ष-साधना के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।
Spiritual Understanding
मनुष्य क्षेत्र का विस्तार केवल भूगोल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संकेत भी है। इसका अर्थ है कि जहाँ धर्म, संयम, तप और अहिंसा का अभ्यास संभव हो, वही मनुष्य जीवन की महत्ता है।जैन धर्म में:
- मनुष्य जन्म दुर्लभ माना गया है
- यही जन्म आत्मकल्याण का अवसर देता है
- इसी क्षेत्र में जीव सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् चारित्र की साधना कर सकता है