Tiryanch panchendriya purush lagatar kitne bhav kar sakta hai
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Answer
पंचेन्द्रिय तिर्यंच की लगातार स्वकाय स्थिति सात या आठ भव मानी गई है। इसलिए संक्षिप्त उत्तर: 7–8 भव। ( jainqq.org)
Explanation
जैन प्रश्नोत्तरी में स्पष्ट रूप से लिखा है कि “पंचेन्द्रिय तिर्यंच और मनुष्य सात या आठ भवों तक स्वकाय में उत्पन्न होते हैं”। एक अन्य ग्रंथ-परंपरा में यह भी बताया गया है कि आठवां भव विशेष परिस्थिति में, जैसे असंख्यात वर्षायु वाले युगलिक प्रकार में, आता है। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
इससे यह बोध मिलता है कि जीव की गति कर्मों पर निर्भर है। जैन दृष्टि में भवों की यह गणना आत्मा की यात्रा को समझने के लिए है, ताकि साधक कर्म-बन्धन से ऊपर उठने का प्रयास करे। ( jainqq.org)
Takeaway
सामान्य उत्तर: 7 या 8 भव।
यदि आप चाहें, तो मैं “स्वकाय स्थिति” का अर्थ भी सरल भाषा में समझा सकता हूँ।