Digamber से shwetamber convert huye
Answer
हाँ, जैन परंपरा में कोई व्यक्ति दिगंबर से श्वेतांबर परंपरा में आ सकता है, लेकिन इसे आम तौर पर “convert” से ज़्यादा परंपरा बदलना या दीक्षा/स्वीकार करना कहा जाता है।Explanation
दिगंबर और श्वेतांबर दोनों जैन धर्म की ही दो प्रमुख परंपराएँ हैं। इनमें अंतर मुख्यतः:- वेश-भूषा में
- पूजा-पद्धति में
- साधु-साध्वी के आचार में
- कुछ आगमिक मान्यताओं में
अगर कोई व्यक्ति किसी श्वेतांबर गुरु या संघ के मार्गदर्शन में उनकी परंपरा को अपनाता है, तो उसे उस परंपरा का अनुयायी माना जा सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया साधारण सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि धार्मिक अनुशासन और परंपरा-स्वीकार से जुड़ी होती है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण है:- सम्यक दर्शन
- सम्यक ज्ञान
- सम्यक चारित्र
दिगंबर हो या श्वेतांबर, लक्ष्य एक ही है — आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग। परंपरा अलग हो सकती है, लेकिन जैन साधना का मूल उद्देश्य एक ही रहता है।