Parigya ke bhed
Answer
परिज्ञा के दो भेद बताए गए हैं:
- ज्ञपरिज्ञा / स्वपरिज्ञा
- प्रत्याख्यानपरिज्ञा.
ज्ञपरिज्ञा का अर्थ है वस्तु या तत्त्व का यथार्थ ज्ञान, और प्रत्याख्यानपरिज्ञा का अर्थ है उस अशुभ का जानकर त्याग करना. ( jainqq.org)
Explanation
सरल भाषा में:
- ज्ञपरिज्ञा = पहले सही से जानना
- प्रत्याख्यानपरिज्ञा = फिर उस अनुचित बात को छोड़ देना
जैन परंपरा में परिज्ञा का यही भाव बताया गया है:
ज्ञान + विरति. (
jainqq.org)
Spiritual Understanding
जैन साधना में केवल जान लेना पर्याप्त नहीं माना जाता।
जब जीव अशुभ प्रवृत्तियों को समझकर उन्हें त्यागता है, तभी परिज्ञा पूर्ण होती है। इसलिए परिज्ञा आत्मशुद्धि और संयम की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है. (
jainqq.org)
Takeaway
पहले जानो, फिर छोड़ो — यही परिज्ञा का सार है। (
jainqq.org)