Kaun se karm ko janjir kar sakte hai
Answer
जैन धर्म के अनुसार आठों कर्म जीव के साथ बंध सकते हैं। ये हैं:- ज्ञानावरणीय कर्म
- दर्शनावरणीय कर्म
- मोहनीय कर्म
- अंतराय कर्म
- वेदनीय कर्म
- आयु कर्म
- नाम कर्म
- गोत्र कर्म
Explanation
अगर आपका प्रश्न है कि कौन-से कर्म बंध सकते हैं, तो उत्तर है: सभी आठ कर्म।इनमें से:
- चार घाती कर्म:
- चार अघाती कर्म:
घाती कर्म आत्मा के गुणों को ढकते हैं, और अघाती कर्म शरीर, आयु, सुख-दुःख और सामाजिक स्थिति से जुड़े होते हैं।
Spiritual Understanding
जैन दर्शन में कर्म आत्मा पर बंध की तरह चिपक जाते हैं। यह बंध कषाय — जैसे क्रोध, मान, माया, लोभ — और योग — मन, वचन, काय की प्रवृत्ति — से होता है।इसलिए:
- अच्छे कर्म भी पुण्य कर्म के रूप में बंध सकते हैं
- और अशुभ कर्म भी पाप कर्म के रूप में बंध सकते हैं
साधना का लक्ष्य है:
- संचय रोकना = संवर
- पुराने कर्म झाड़ना = निर्जरा