जैन महाभारत की प्रमुख और पहली पूर्ण रचना आचार्य जिनसेन पन्नाट द्वारा रचित हरिवंशपुराण मानी जाती है। जैन परंपरा में महाभारत-कथा पर और भी रचनाएँ हैं, जैसे पांडवचरित, पांडवपुराण आदि। ( jainpedia.org)
स्पष्टीकरण
जैन साहित्य में “महाभारत” केवल एक ही ग्रंथ का नाम नहीं है, बल्कि महाभारत-सम्बंधी कथाओं की एक परंपरा है। इस परंपरा की पहली पूर्ण जैन महाभारत-रचना हरिवंशपुराण है, जिसे जिनसेन पन्नाट ने 783 ई. में पूर्ण किया था। बाद की जैन रचनाओं में स्वयंभू-देव, देवप्रभ-सूरि, और शुभचन्द्र के ग्रंथ भी प्रसिद्ध हैं। ( jainpedia.org)
आध्यात्मिक समझ
जैन दृष्टि में इन कथाओं का उद्देश्य केवल इतिहास सुनाना नहीं, बल्कि धर्म, वैराग्य, अहिंसा और कर्म-सिद्धान्त को समझाना भी है। इसलिए जैन महाभारत की कथाएँ जैन मूल्यों के प्रकाश में कही गई हैं। ( jainpedia.org)
सार
यदि आप एक नाम पूछ रहे हैं, तो उत्तर है: आचार्य जिनसेन पन्नाट। ( jainpedia.org)