नमोतथुण का पाड
Answer
नमोत्थुणं जैन धर्म की एक बहुत ही पवित्र प्रार्थना है। यह अरिहंतों को नमन करने वाली स्तुति है।पाठ (प्रचलित प्रारूप): णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आइरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं
Explanation
इस पाठ में हम क्रमशः नमस्कार करते हैं:- अरिहंतों को
- सिद्धों को
- आचार्यों को
- उपाध्यायों को
- साधुओं को
यह जैन धर्म का नवकार मंत्र / नमस्कार मंत्र है। “नमोत्थुणं” और “णमोकार” भावना एक ही आदर और विनय की भावना को प्रकट करती है।
Spiritual Understanding
इस प्रार्थना का अर्थ केवल “नमस्कार” करना नहीं है, बल्कि:- अहंकार को कम करना
- गुणों के प्रति श्रद्धा रखना
- मोक्षमार्ग की ओर मन को लगाना
- पवित्र आत्माओं के गुणों को स्मरण करना
जैन धर्म में यह बहुत ऊँची साधना मानी जाती है, क्योंकि इसमें किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मिक गुणों को नमन किया जाता है।