Praveshnak kitne prakar ke hote hai badi sadhu vandana ke anusar
Answer
प्रवेशनक चार प्रकार के होते हैं। इनमें—
- नैरयिक-प्रवेशनक
- तिर्यग्योनिक-प्रवेशनक
- मनुष्य-प्रवेशनक
- देव-प्रवेशनक शामिल हैं। ( jainqq.org)
Explanation
जैन आगम के अनुसार
प्रवेशनक का अर्थ है एक गति से मरकर दूसरी गति में प्रवेश करना। इसलिए इसके चार भेद बताए गए हैं—नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव गति में प्रवेश। (
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Spiritual Understanding
इसका भाव यह है कि जीव अपने कर्मों के अनुसार अलग-अलग गतियों में प्रवेश करता है। जैन दृष्टि में यही कर्म-बंधन और गति-परिवर्तन का गहरा सिद्धांत है। (
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Takeaway
संक्षेप में: प्रवेशनक 4 प्रकार के होते हैं। (
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