मेतार्य मुनि की प्रसिद्ध घटना यह है कि एक बहुत गर्म दिन वे भिक्षा के लिए एक सुनार के घर गए। सुनार सोने के छोटे दाने बना रहा था। उसी समय एक पक्षी उन दानों को अन्न समझकर निगल गया। बाद में सुनार को दाने गायब मिले, तो उसने संदेह करके मुनि को पकड़ लिया। मेतार्य मुनि ने पक्षी की जान बचाने के लिए सच नहीं बताया, क्योंकि उन्हें डर था कि सुनार पक्षी को मार देगा। फिर सुनार ने उन्हें धूप में खड़ा करके सिर पर गीली चमड़े की पट्टी बाँध दी। मुनि ने पूरे समभाव के साथ कष्ट सहा, और अंत में उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ तथा शरीर का अंत हो गया। बाद में पक्षी ने दाने उगल दिए, तब सुनार को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ। ( jainworld.jainworld.com)
शिक्षा
यह घटना जैन धर्म की अहिंसा, करुणा, क्षमा और समभाव की बहुत सुंदर शिक्षा देती है। मेतार्य मुनि ने एक छोटे जीव के प्राण बचाने के लिए अपना कष्ट सह लिया, जो जैन साधना की गहराई को दिखाता है। ( jainworld.jainworld.com)
Takeaway
मेतार्य मुनि की घटना हमें सिखाती है कि सच्चा साधक वह है जो अहिंसा और आत्म-समभाव को जीवन में सबसे ऊपर रखे।