जैन शास्त्र के अनुसार कौनसे साधु के पास बुखार उतारने का मंत्र था
Answer
अगर आप
“उवसग्गहरं स्तोत्र” वाली जैन कथा पूछ रहे हैं, तो वह
आचार्य भद्रबाहु स्वामी से जुड़ी मानी जाती है। Jainpedia में भी इस स्तोत्र को
Bhadrabahu के नाम से attributed बताया गया है। (
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Explanation
उस परंपरागत कथा में आचार्य भद्रबाहु ने एक
मंत्र-युक्त स्तोत्र का पाठ किया, मंत्रित जल छिड़का, और लोगों ने उपसर्ग शांत होने के साथ
“मेरा बुखार उतर गया” जैसी अनुभूति बताई। इसलिए जैन परंपरा में यह स्तोत्र उपसर्ग, रोग और कष्ट-शांति से जोड़ा जाता है। (
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Spiritual Understanding
जैन दृष्टि में ऐसी कथाएँ यह सिखाती हैं कि
शुद्ध श्रद्धा, भक्ति और आराधना मन को स्थिर करती है और संकट के समय आध्यात्मिक सहारा देती है। यह चमत्कार से अधिक
आत्मिक बल और उपशम का संदेश देती है। (
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Takeaway
संक्षेप में, बुखार-निवारण वाले प्रसिद्ध मंत्र/स्तोत्र के संदर्भ में नाम आता है
आचार्य भद्रबाहु स्वामी का। (
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