यदि आपका आशय जैन ग्रंथों के शंखकुमार / शंख राजा से है, तो उनकी प्रमुख पत्नी यशोमती बताई गई है। बाद में विद्याधर कन्याओं से भी उनका विवाह हुआ, इसलिए ग्रंथ में “यशोमती आदि पत्नियाँ” कहा गया है; सभी पत्नियों के अलग-अलग नाम उस अंश में नहीं दिए गए हैं। ( jainqq.org)
Explanation
त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र में शंखकुमार के लिए यशोमती का नाम स्पष्ट रूप से आता है, और आगे “यशोमती आदि पत्नियों” भी लिखा है। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
इस प्रसंग में मुख्य संदेश वैवाहिक नामों से अधिक वैराग्य और संसार के अस्थायी संबंधों की समझ है। शंखकुमार के प्रसंग में आगे चलकर यही बोध आध्यात्मिक परिवर्तन का कारण बनता है। ( jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में: यशोमती प्रमुख नाम है, और शेष पत्नियों का उल्लेख “आदि” रूप में मिलता है। ( jainqq.org)