पेर के ऊपर औषध का लेप लगाकर उसकी शक्ति से पंचतीर्थ की यात्रा किसने की
उत्तर
जैन परंपरा में इसका श्रेय मुख्यतः
आचार्य श्री पादलिप्तसूरि को दिया जाता है। कुछ उल्लेखों में
श्री नागार्जुनसूरि और
श्री स्कन्दिलसूरि का भी साथ में नाम आता है। (
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स्पष्टीकरण
एक जैन स्रोत में बताया गया है कि ये तीनों आचार्य अपने पैरों में औषधि का लेप कर आकाशमार्ग से सिद्धाचल, गिरनार, सम्मेतगिरि, नन्दिया चैत्र और ब्राह्मणवाटक जैसे तीर्थों की यात्रा करते थे। पादलिप्तसूरि के बारे में यह भी परंपरा है कि वे पैरों में औषधि-लेप से गमन की अद्भुत विद्या के लिए प्रसिद्ध थे। (
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आध्यात्मिक अर्थ
यह प्रसंग जैन परंपरा में आचार्य-ऋद्धि, तप, और धर्मप्रभाव की महिमा को दर्शाता है। इसका भाव यह है कि शुद्ध साधना और संयम से असाधारण प्रभाव उत्पन्न होता है। (
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संक्षिप्त निष्कर्ष
यदि एक नाम अपेक्षित हो, तो उत्तर है:
आचार्य पादलिप्तसूरि। यदि पूर्ण परंपरागत उल्लेख देना हो, तो
नागार्जुनसूरि, स्कन्दिलसूरि और पादलिप्तसूरि — तीनों का नाम आता है। (
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