छठे आरे के बाद मनुष्य का अस्तित्व रहेगा या नहीं?
Answer
हाँ, Jain धर्म के अनुसार छठे आरे के बाद मनुष्य का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त नहीं होता। समय-चक्र आगे बढ़ता रहता है, और उसके बाद अगला काल-चक्र, यानी उत्सर्पिणी, आरम्भ होता है। उसमें भी मनुष्य-जीवन होता है, लेकिन परिस्थितियाँ बदल जाती हैं।Explanation
जैन दर्शन में समय को दो भागों में देखा जाता है:- अवसर्पिणी — जहाँ क्रमशः अधःपतन होता है
- उत्सर्पिणी — जहाँ क्रमशः उन्नति होती है
हर भाग में 6 आर होते हैं। अभी हम अवसर्पिणी के पंचम/षष्ठ आर के युग में हैं, और छठे आर के बाद नया चक्र आरम्भ होता है।
इसलिए:
- मनुष्य-जीवन सदा के लिए नष्ट नहीं होता
- लेकिन प्रत्येक आर में मनुष्य की आयु, शरीर, बल, और परिस्थितियाँ अलग होती हैं
- छठे आर के अंत में स्थिति बहुत ही कठिन हो जाती है, और उसके बाद नया समय-चक्र शुरू होता है