किन के अभाव के कारण भगवान महावीर की 66 दिन तक दिव्या ध्वनि नहीं खीरी
भगवान महावीर की दिव्य ध्वनि (समवसरण में उपदेश देने की दिव्य शक्ति) 66 दिन तक नहीं खीरी, इसका प्रमुख कारण उनके समवसरण में उपयुक्त श्रावक (सुनने वाले) की अनुपस्थिति था। जैन शास्त्रों के अनुसार, जब तक भगवान के समवसरण में योग्य और जिज्ञासु व्यक्ति—विशेषकर गौतम गणधर—नहीं पहुँचे, तब तक उनकी दिव्य ध्वनि प्रकट नहीं हुई। गौतम गणधर भगवान महावीर के प्रथम गणधर (मुख्य शिष्य) थे, जिनके बिना भगवान महावीर के उपदेशों को सही रूप में ग्रहण करने वाला कोई नहीं था।
इसलिए, गौतम गणधर के अभाव में 66 दिन तक भगवान महावीर मौन रहे और उनकी दिव्य ध्वनि नहीं खीरी। जैसे ही गौतम गणधर समवसरण में पहुँचे एवं उन्होंने भगवान महावीर से प्रश्न किया, तब भगवान की दिव्य ध्वनि प्रकट हुई और धर्म-चक्र प्रवर्तन का आरंभ हुआ।
सारांश: भगवान महावीर की 66 दिन तक दिव्य ध्वनि नहीं खीरी, क्योंकि उस समय तक समवसरण में उनके योग्य प्रथम श्रोता—गौतम गणधर—उपस्थित नहीं थे।