वह ज्ञान जो सिद्धआलय तक जीव के साथ जाता है
जैन धर्म के अनुसार, "मोहनीय कर्म" के क्षय होने पर आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त करती है और "सिद्ध" अवस्था को प्राप्त होती है। जब जीव मोक्ष (सिद्धालय) को प्राप्त करता है, तब उसके साथ केवल "केवलज्ञान" (सर्वज्ञता) जाता है। इसके अतिरिक्त, सांसारिक ज्ञान जैसे मतिज्ञान (इंद्रियों द्वारा प्राप्त ज्ञान), श्रुतज्ञान (श्रुति या शास्त्रों द्वारा प्राप्त ज्ञान), अवधि ज्ञान, और मन:पर्यय ज्ञान आदि का बंधन समाप्त हो जाता है।
सारांश: सिद्धालय (मोक्ष) तक केवल 'केवलज्ञान' जीव के साथ जाता है। सांसारिक या लौकिक ज्ञान वहां तक जीव के साथ नहीं जाता।