Nav ang pooja shlok
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Answer
नव अंग पूजा में, श्वेताम्बर परंपरा के अनुसार, तिर्थंकर प्रतिमा के 9 अंगों पर ये 9 पंक्तियाँ पढ़ी जाती हैं: ( jainfoundation.in)( jainfoundation.in)
- दाहिने पाँव का अंगूठा, फिर बायाँ पाँव का अंगूठा — नमो अरिहंताणं
- दाहिना घुटना, फिर बायाँ घुटना — नमो सिद्धाणं
- दाहिनी बाँह का मध्य भाग, फिर बायाँ — नमो आइरियाणं
- दाहिना कंधा, फिर बायाँ कंधा — नमो उवज्झायाणं
- सिर का मध्य भाग — नमो लोए सव्वसाहूणं
- ललाट के मध्य — एसो पंच नमोक्कारो
- कंठ के मध्य — सव्व पावप्पणासणो
- छाती के मध्य — मंगलाणं च सव्वेसिं
- नाभि — पढमं हवइ मंगलं
Explanation
यह “एक ही श्लोक” नहीं, बल्कि नव अंग पूजा के लिए 9 अलग-अलग मंत्र-पंक्तियाँ हैं। इन्हें प्रतिमा के 9 अंगों पर क्रम से पढ़ा जाता है। ( jainfoundation.in)
Spiritual Understanding
इस पूजा का भाव यह है कि प्रभु की प्रतिमा के माध्यम से हम नमस्कार, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का स्मरण करें। यह पूजा मन को विनय, एकाग्रता और भक्ति में स्थापित करती है। ( jainfoundation.in)
Takeaway
यदि आप चाहें, तो मैं इसी नव अंग पूजा को देवनागरी में “पूरी विधि सहित” भी लिख सकता हूँ।