At the end of nav and puja when this Doha is recited which part of the Pratima should be touched उपदेशक नव तत्त्व ना, तिणे नव अंग जिणंद ।पूजो बहुविध राग थी, कहे शुभ वीर मुणींद ॥
Answer
इस दोहे के साथ सामान्यतः प्रातिमा के चरण-कमल का ही वंदन/स्पर्श किया जाता है।
यदि आपकी पूजा-विधि या परंपरा में कोई विशेष निर्देश हो, तो उसी का पालन करें।Explanation
जैन पूजा में प्रतिमा के प्रति सबसे अधिक श्रद्धा चरणों के वंदन से प्रकट की जाती है।
सामान्यतः मुख, नेत्र या अन्य भागों को छूने की अपेक्षा चरणों का वंदन अधिक सम्मानजनक माना जाता है।Spiritual Understanding
चरण-वंदन का भाव विनय, भक्ति और समर्पण का है।
इससे साधक अपने भीतर नम्रता, श्रद्धा और धर्म-पालन की भावना जगाता है।Takeaway
संक्षेप में, इस दोहे के समय प्रायः प्रातिमा के चरण ही वंदन के लिए स्पर्श किए जाते हैं।