Panchpermesti ke gun
पंचपरमेष्ठी (Panch Parmesthi) जैन धर्म में पाँच परम पूज्य और वंदनीय व्यक्तित्वों का समूह है। इनके गुण इस प्रकार हैं:
- अरिहंत (Arihant):
- कर्मों का नाश कर चुके होते हैं - केवलज्ञान (संपूर्ण ज्ञान) प्राप्त होता है - राग-द्वेष से रहित होते हैं - अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह का पालन करते हैं - लोककल्याण के लिए उपदेश देते हैं
- सिद्ध (Siddh):
- सारे कर्मों का पूर्णतः नाश - जन्म-मरण के चक्र से मुक्त - शुद्ध आत्मा का स्वरूप - अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत सुख, अनंत वीर्य के धारक - सदा के लिए सिद्धशिला में स्थित
- आचार्य (Acharya):
- संपूर्ण संघ के प्रधान - शास्त्रों का गहन ज्ञान - चर्या में आदर्श - धर्म की शिक्षा व प्रचार - संयम, विनय, और शील के प्रतिमान
- उपाध्याय (Upadhyay):
- शास्त्रों का अध्ययन व अध्यापन करने वाले - आचार्य के बाद संघ का संचालन - श्रुतज्ञान में निपुण - साधुओं का मार्गदर्शन - शिष्य निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका
- साधु (Sadhu):
- पाँच महाव्रतों का पालन - संयमित जीवन - अहिंसा पर दृढ़ - तप, स्वाध्याय, और साधना में रत - त्याग और वैराग्य के प्रतीक
इन पंचपरमेष्ठियों के गुणों की वंदना करना जैन धर्म का मूल कर्तव्य है, जो "णमोकार मंत्र" में भी समाहित है।