Moksh k ichuk ko kya dharan karana aavshyak h
मोक्श (मोक्ष) के इच्छुक अर्थात जो व्यक्ति मोक्ष प्राप्ति की अभिलाषा रखता है, उसके लिए जैन धर्म के अनुसार कुछ आवश्यक धारणाएँ (आचरण/धारणाएँ) अपनाना आवश्यक है। मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए:
- सम्यक् दर्शन (सही दृष्टिकोण):
मोक्ष के इच्छुक को सम्यक् दर्शन, यानी तत्त्वों की सही समझ और श्रद्धा होना आवश्यक है।
- सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान):
जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, बंध, निर्जरा, मोक्ष—इन नव तत्त्वों का सही ज्ञान आवश्यक है।
- सम्यक् चारित्र (सही आचरण):
पंच महाव्रत (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) का पालन, संयम, तपा (तपस्या), क्षमा आदि धर्मों का पालन करना आवश्यक है।
- त्रिरत्न (तीन रत्नों) की साधना:
जैन धर्म में सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, और सम्यक् चरित्र—इन तीनों का एक साथ पालन ही मोक्ष मार्ग है।
- राग-द्वेष का त्याग:
मोक्ष के इच्छुक को राग (आसक्ति) और द्वेष (घृणा) छोड़ना चाहिए।
- संसार से वैराग्य:
संसारिक विषय-वासना से वैराग्य और आत्मकल्याण की भावना आवश्यक है।
- साधु-संगति और स्वाध्याय:
साधु-संतों की संगति और आत्म-चिंतन, स्वाध्याय (शास्त्रों का अध्ययन) करना चाहिए।
- तप और संयम:
शरीर और मन दोनों का संयम, उपवास, प्रतिक्रमण, कायोत्सर्ग आदि तपों का अभ्यास आवश्यक है।
इन धारणाओं को अपनाने वाला व्यक्ति ही मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है। जैन आगमों के अनुसार, मोक्ष के इच्छुक को बाह्य और आन्तरिक शुद्धि, दोनों का पालन करना चाहिए।