रसासक्त मंगू आचार्य मर क र कौन सी गति में गए जैन धर्म के अनुसार
Answer
जैन कथा के अनुसार आचार्य मंगू मरकर उसी नगर के यक्षालय में
यक्ष बने। जैन cosmology में
यक्ष, व्यंतर देवों के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उन्हें
देवगति में गया माना जाएगा। (
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Explanation
कथा में बताया गया है कि स्वादिष्ट आहार की आसक्ति बढ़ने के कारण आचार्य मंगू में रस-गृद्धि आ गई। उसी कारण वे साधु-जीवन की मर्यादा से शिथिल हुए और अंत में बिना आलोचना किए मरकर यक्ष हुए। (
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Spiritual Understanding
इस कथा की मुख्य शिक्षा यह है कि साधु के लिए भी
रसासक्ति और
भोग-लालसा बहुत बड़ा बाधक बन सकती है। जैन धर्म में संयम, वैराग्य और इंद्रिय-जय को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। (
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Takeaway
संक्षेप में:
आचार्य मंगू यक्ष बने, यानी देवगति में गए। उनकी कथा स्वाद-लोलुपता से बचने की सीख देती है। (
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