इन सब की आगे की गति बताइए बालक संगम गवाला राम भक्त हनुमान महा बलवान बाहुबली
Answer
जैन परंपरा में इन पात्रों की आगे की गति इस प्रकार बताई जाती है:
बालक संगम/गवाला वही आत्मा है जो आगे चलकर
शालिभद्र के रूप में जन्मी; बाद में उसने मुनि-जीवन अपनाया और अंत में
सर्वार्थसिद्धि स्वर्ग में जन्म लिया.
जैन रामकथा के अनुसार
हनुमान ने भी अंत में पूर्ण वैराग्य और
मोक्ष प्राप्त किया.
बाहुबली ने एक वर्ष की घोर तपस्या के बाद
केवलज्ञान पाया और फिर
अंतिम मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त की; दिगंबर परंपरा में उन्हें इस अवसर्पिणी में प्रथम मुक्त पुरुष भी माना जाता है. (
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Explanation
- संगम/गवाला की कथा में वह पहले एक गरीब बालक था, जिसने एक जैन मुनि को प्रेम से भोजन अर्पित किया; उसी के परिणामस्वरूप वह आगे शालिभद्र बना. बाद में शालिभद्र और धanya ने संन्यास लिया और सर्वार्थसिद्धि में जन्म पाया. ( jainpedia.org)
- हनुमान के विषय में जैन ग्रंथों में उन्हें अंततः मोक्ष प्राप्त करने वाला बताया गया है. कुछ जैन कथाओं में राम, हनुमान, सुग्रीव आदि को भी अंतिम मुक्ति प्राप्त जीवों के रूप में वर्णित किया गया है. ( jainworld.jainworld.com)
- बाहुबली की कथा में उनके भीतर का अहंकार समाप्त होने पर उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ और फिर मोक्ष. ( jainpedia.org)
Spiritual Understanding
इन कथाओं का मुख्य संदेश है:
दान, वैराग्य, क्षमा, अहंकार-त्याग और आत्म-जय से जीव की गति ऊँची होती है. जैन धर्म में बाहरी बल से नहीं, बल्कि
अंतर की शुद्धि से मुक्ति का मार्ग खुलता है. (
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Takeaway
संक्षेप में:
संगम → शालिभद्र → मोक्षमार्ग,
हनुमान → मोक्ष,
बाहुबली → केवलज्ञान और मोक्ष. (
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