संयम विराधक कंडरिक मुनि,गुरु द्रोही बालचंद मुनि,लुटारु वंकचुल गति क्या हुई
Answer
- कंडरिक मुनि की दुर्गति हुई और वे 7वीं नरक के वासी बने। ( bhavsankalan.blogspot.com)
- वंकचूल ने अरिहंत आदि की शरण लेकर मरकर 12वें देवलोक में देव-गति पाई। ( jainmedia.in)
- बालचन्द्र के बारे में जो संदर्भ मैंने देखे, उनमें वह विद्वान होते हुए भी गुरुद्रोही बताया गया है, लेकिन उसकी अगली गति का स्पष्ट उल्लेख मुझे उन स्रोतों में नहीं मिला। ( jainqq.org)
स्पष्टीकरण
जैन दृष्टि से:
- संयम की विराधना करने से जीव दुर्गति की ओर जाता है — जैसे कंडरिक मुनि। ( bhavsankalan.blogspot.com)
- शरणागति, नियम-पालन और आत्मसंयम से उन्नति होती है — जैसे वंकचूल। ( jainmedia.in)
- गुरुद्रोह बहुत गंभीर कर्म माना गया है; इसलिए बालचन्द्र के प्रसंग में भी उसका आचरण निंदनीय बताया गया है। ( jainqq.org)
Takeaway
जैन धर्म में संयम की रक्षा उन्नति का मार्ग है, और संयम-विराधना, गुरुद्रोह, तथा प्रमाद पतन का कारण बनते हैं।