मातृ पितृ भक्त कुर्मा पुत्र गुरु द्रोही गोषालक ब्राह्मण देव शर्मा नवपद आराधक श्रीपाल राजा की गति क्या हुई
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उत्तर
परंपरागत जैन कथाओं के आधार पर संक्षेप में—- मातृ-पितृ भक्त कूर्मापुत्र: उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ; इस अंश में उनकी अंतिम मोक्ष-गति स्पष्ट रूप से नहीं कही गई है। ( jainqq.org)
- गुरु-द्रोही गोशालक: उनकी नरकगति / बहुत ही भयंकर दुर्गति बताई गई है; जैन कथाओं में उनके लिए सात नरकों के दुःखों का उल्लेख मिलता है। ( jainqq.org)
- ब्राह्मण देवशर्मा: उपलब्ध जैन स्रोतों में यहाँ केवल इतना मिलता है कि भगवान महावीर ने गौतमस्वामी को उसे प्रतिबोध देने भेजा था; उसकी अंतिम गति का स्पष्ट, एकमत उल्लेख मुझे नहीं मिला। ( jainqq.org)
- नवपद आराधक श्रीपाल राजा: नवपद आराधना से उन्हें आरोग्य, राज्य और धर्मनिष्ठ जीवन मिला; उपलब्ध स्रोत में उनकी अंतिम गति स्पष्ट रूप से नहीं दी गई, केवल यह बताया गया है कि उन्होंने शेष जीवन राजा के रूप में बिताया। ( jainqq.org)
संक्षिप्त सार
अगर एक-शब्द में देखें तो:- गोशालक — नरकगति
- कूर्मापुत्र — केवलज्ञानप्राप्त
- देवशर्मा — स्पष्ट नहीं
- श्रीपाल — उत्तम धर्ममार्गी जीवन, अंतिम गति स्पष्ट नहीं ( jainqq.org)