नवकार आराधक शिवकुमार विद्याधर नामी विनमी धर्मराज युधिष्ठिर महावीर भक्त श्रेणिक की मरकर गति क्या हुई
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Answer
जैन परंपरा में इनके बारे में सामान्यतः यह गति बताई जाती है:- शिवकुमार — समाधिमरण के बाद ब्रह्मदेव लोक में विद्युन्माली देव हुए। ( jainqq.org)
- नामी-विनमी — शत्रुंजय तीर्थ पर मुनि बनकर अनशनपूर्वक मोक्ष / सिद्धगति को प्राप्त हुए। ( jainqq.org)
- धर्मराज युधिष्ठिर — जैन कथाओं में पाँच पांडवों सहित मोक्ष / सिद्धि प्राप्त करने वाला बताया गया है। ( jainqq.org)
- महावीर भक्त श्रेणिक — जैन कथा-परंपरा में उसका जीव नरकगति, विशेषकर प्रथम नरक, में बताया गया है। ( jainqq.org)
Explanation
जैन धर्म में मृत्यु के बाद गति कर्मों के अनुसार होती है। इसलिए किसी के भक्ति-भाव या सांसारिक सम्मान से नहीं, बल्कि उसके कर्म, भाव, और अंतिम परिणाम से अगली गति निर्धारित मानी जाती है। ( jainqq.org)Spiritual Understanding
इन कथाओं का मुख्य संदेश यह है कि:- नवकार, सम्यक् भाव, और संयम उच्च गति का कारण बनते हैं। ( jainqq.org)
- अहंकार, हिंसा, और कषाय नीचे की गति का कारण बनते हैं। ( jainqq.org)