Kis jiv ki nigod ki gati hui
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Answer
जैन धर्म में निगोद गति उन अत्यन्त सूक्ष्म एकेन्द्रिय जीवों की मानी जाती है, जिन्हें निगोदिया जीव कहा जाता है।Explanation
- ये जीव बहुत ही सूक्ष्म और अल्प-विकसित होते हैं।
- ये एक ही शरीर में बहुत बड़ी संख्या में रह सकते हैं।
- निगोद अवस्था को जीव का सबसे निम्न और कष्टदायक जन्म-स्थान माना गया है।
Spiritual Understanding
निगोद गति हमें यह समझाती है कि:- जीवों की यात्रा बहुत लंबी होती है।
- कर्म के कारण जीव नीचे-ऊपर सभी अवस्थाओं में भटक सकता है।
- इसलिए सम्यक् दर्शन, संयम, और अहिंसा बहुत महत्वपूर्ण हैं।