Ravan and raja shrenik ki gati kya hui
Answer
जैन परंपरा के अनुसार:
- रावण की गति नरकगति हुई; जैन रामायण में उसे चौथे नरक में बताया गया है। ( jainqq.org)
- राजा श्रेणिक (बिंबिसार) के बारे में सामान्य जैन वर्णन यह है कि उनकी अगली गति नरक हुई; कुछ ग्रंथों में उनके सातवें नरक के बंधन के बाद वह प्रथम नरक तक कम हुआ बताया गया है, इसलिए प्रचलित रूप से प्रथम नरक कहा जाता है। ( jainqq.org)
Explanation
जैन दर्शन में गति कर्मों के अनुसार मिलती है। बहुत हिंसा, क्रोध, अहंकार और आसक्ति के कारण नरकगति का बंध माना जाता है। रावण और श्रेणिक—दोनों के बारे में जैन कथाओं में यही शिक्षा दी गई है कि बाहरी वैभव या भक्ति के बावजूद कर्म का फल अवश्य मिलता है। (
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Spiritual Understanding
इससे जैन धर्म यह सिखाता है कि केवल नाम, शक्ति या राज्य से मुक्ति नहीं मिलती।
अहिंसा, संयम, सम्यक् दृष्टि और पाप से विरति ही आत्मा को ऊर्ध्वगति की ओर ले जाती है। (
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Takeaway
संक्षेप में:
रावण — चौथा नरक, और
राजा श्रेणिक — नरकगति, प्रचलित रूप से प्रथम नरक। (
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