According to Jainism samayak ke satve paadh ke teen naam kause?
Answer
अगर आपका मतलब
सप्तभंगी के
सातवें भंग से है, तो उसके तीन शब्द/अवयव हैं:
- स्याद्
- अस्ति-नास्ति
- अवक्तव्य
अर्थात सातवाँ भंग होता है: “स्यादस्ति-नास्ति-अवक्तव्य”। ( jainqq.org)
Explanation
जैन दर्शन में सप्तभंगी के सात भंग माने गए हैं। सातवें भंग में किसी वस्तु के लिए एक साथ
अस्तित्व,
नास्तित्व और
अवक्तव्यता—तीनों का प्रयोग किया जाता है। इसलिए उसके तीन नाम/पद यही माने जाते हैं। (
jainqq.org)
Spiritual Understanding
यह जैन दर्शन की
अनेकांत दृष्टि को दिखाता है—कि सत्य को एक ही कोण से नहीं, अनेक अपेक्षाओं से समझना चाहिए। (
jainworld.jainworld.com)
Takeaway
सातवाँ भंग = स्यादस्ति-नास्ति-अवक्तव्य।
अगर आप चाहें, मैं इसके
सातों भंग बहुत सरल हिंदी में भी लिख सकता हूँ।