जैन कथा-परंपरा में औत्पत्तिकी बुद्धि रोहक की मानी गई है — यानी भरत नर्तक के पुत्र रोहक की। नन्दी-परंपरा की कथा में राजा ने उसकी इसी बुद्धि की प्रशंसा की थी। ( jainqq.org)
Explanation
जैन दर्शन में औत्पत्तिकी बुद्धि का अर्थ है ऐसी सहज, तुरंत समझ आने वाली बुद्धि, जो पहले सुने या पढ़े बिना भी सही निष्कर्ष तक पहुँच जाती है। इसे मति-ज्ञान के चार भेदों में गिना गया है। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
जैन दृष्टि में यह बुद्धि एक विशेष क्षयोपशमजन्य प्रतिभा मानी जाती है। इसका अर्थ है कि जीव में ज्ञानावरण कर्म के क्षय-उपशम से ऐसी तीव्र बोध-शक्ति प्रकट होती है। ( jvbi.ac.in)
Takeaway
संक्षेप में: औत्पत्तिकी बुद्धि रोहक की थी। सामान्य रूप से, यह जैन मति-ज्ञान का एक विशिष्ट प्रकार है। ( jainqq.org)