जम्मू स्वामी का पूर्व भाव क्या था
Answer
जम्बू स्वामी का पूर्व भाव
भवदेव माना जाता है। कुछ पारंपरिक विवरणों में उनके जीवन-क्रम में भवदेव के बाद स्वर्ग-गति, फिर
शिवकुमार, और उसके बाद
जम्बूकुमार / जम्बू स्वामी का जन्म बताया गया है। (
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Explanation
अर्थात जम्बू स्वामी की वैराग्य-परंपरा का प्रारंभिक संबंध उनके पूर्व जन्म
भवदेव से जोड़ा जाता है। इसी पुण्य-परंपरा के कारण आगे चलकर उन्हें संयम, तप और अंततः केवलज्ञान की प्राप्ति हुई। (
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Spiritual Understanding
जैन परंपरा में यह बताया जाता है कि पूर्व जन्मों के संस्कार आत्मा की आगे की यात्रा को प्रभावित करते हैं। जम्बू स्वामी का उदाहरण यह सिखाता है कि वैराग्य, तप और सम्यक दृष्टि के संस्कार आत्मा को ऊँचे आध्यात्मिक लक्ष्य तक ले जा सकते हैं। (
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Takeaway
संक्षेप में, जम्बू स्वामी का पूर्व भाव
भवदेव था। (
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