कौन मरकर जी की गति में गया
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Answer
जैन धर्म के अनुसार मरण के बाद जीव अपने कर्मों के अनुसार अगली गति में जाता है। वह देव गति, मनुष्य गति, तिर्यंच गति, या नरक गति में जा सकता है।Explanation
आपका प्रश्न थोड़ा अस्पष्ट है, क्योंकि “जी की गति” से क्या आशय है, यह स्पष्ट नहीं है। यदि आप “जीव की गति” पूछ रहे हैं, तो जैन धर्म में उत्तर यह है:- जिस जीव ने जैसे कर्म बाँधे हैं, वैसी ही उसकी अगली गति होती है।
- यह किसी एक निश्चित व्यक्ति पर लागू नहीं होता, बल्कि सभी जीवों पर लागू होता है।
- मृत्यु के बाद आत्मा नष्ट नहीं होती, वह कर्मों के अनुसार नया जन्म लेती है।