राजा समरादित्य व्रत आराधक सुव्रत श्रेष्टि विषयासत्त नंदी की आत्मा मरकर क्या हुई
Answer
समरादित्य-कथा में विषयासक्ति का फल दुर्गति बताया गया है। यदि आप उस विषयासक्त पात्र की बात कर रहे हैं, तो उसकी आत्मा मरकर
सातवीं नरक में नारकी उत्पन्न हुई। (
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Explanation
हरिभद्रसूरि की
समराइच्चकहा में समरादित्य और प्रतिनायक के अनेक भवों का वर्णन है। कथा के अंत में स्पष्ट कहा गया है कि
गिरिषेण मरकर
सातवीं नरक में उत्कृष्ट आयु वाला नारकी हुआ, जबकि समरादित्य शैलेशीकरण करके सिद्धिगत के शाश्वत सुख का भोगी बना। (
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Spiritual Understanding
जैन धर्म में
विषयासक्ति आत्मा को नीचे गिराने वाली मानी गई है, और
वैराग्य, संयम, व्रत-आराधना आत्मा को ऊर्ध्वगति की ओर ले जाते हैं। इस कथा का यही गहरा संदेश है। (
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Takeaway
यह कथा सिखाती है कि विषयों में आसक्ति नहीं, बल्कि धर्म और संयम ही आत्मा का कल्याण करते हैं। (
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