व्रत आराधक सुब्रत श्रेष्ठि मरकर कहां गए
Answer
यदि आप मौन एकादशी कथा वाले सुव्रत श्रेष्ठि की बात कर रहे हैं, तो उनकी मृत्यु के बाद उनकी आत्मा ग्यारहवें देवलोक में गई। कथा के अनुसार, 21 सागरोपम के बाद उनका पुनर्जन्म भरतक्षेत्र के सौरीपुर नगर में सेठ समृद्धिदत्त के पुत्र के रूप में हुआ। ( oshwal.org.uk)Explanation
जैन कथा में यह बताया गया है कि उन्होंने 11 वर्ष 11 महीने तक मौन सहित एकादशी व्रत का पालन किया, और उसके फलस्वरूप उत्तम गति प्राप्त की। ( oshwal.org.uk)Spiritual Understanding
जैन धर्म में व्रत, तप और मौन से शुभ कर्म बंधते हैं। इसलिए ऐसे पुण्यकारी जीवन का फल केवल इस जन्म में नहीं, बल्कि अगले जन्मों में भी श्रेष्ठ गति के रूप में बताया गया है। ( jainworld.jainworld.com)Takeaway
संक्षेप में, सुव्रत श्रेष्ठि मृत्यु के बाद ग्यारहवें देवलोक में गए। ( oshwal.org.uk)यदि आप मुनिसुव्रत भगवान के पूर्वजन्म वाले सुरश्रेष्ठ की बात कर रहे थे, तो वह प्राणत कल्प के देवलोक में पुनर्जन्मे थे। ( jainworld.jainworld.com)