ब्रह्मचारी नारद ऋषि की गति क्या हुई
Answer
जैन परंपरा में नारद ऋषि के बारे में एक ही निश्चित मत नहीं मिलता। त्रिलोकसार/तिलोयपण्णत्ती की परंपरा में उन्हें पूर्ण ब्रह्मचारी बताया गया है, लेकिन हिंसा-दोष के कारण नरकगामी कहा गया है; दूसरी ओर ऋषिभाषित की परंपरा को आधार मानकर कुछ जैन विद्वानों ने उनकी आगामी सिद्धगति बताई है। (
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Explanation
इसलिए यदि आप “किस एक निश्चित गति” का उत्तर पूछ रहे हैं, तो जैन साहित्य में वह एकरूप नहीं है। संदर्भ के अनुसार उत्तर बदलता है: कुछ ग्रंथों में नरकगति, और ऋषिभाषित-आधारित व्याख्या में सिद्धगति। (
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Takeaway
संक्षेप में, “ब्रह्मचारी नारद” के लिए जैन ग्रंथों में एक मत नरकगति का है और दूसरा मत सिद्धगति का; इसलिए संदर्भ पूछना ज़रूरी होता है। (
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