पुण्यसाली शालीभद्र एवं श्रेष्ठिवर्य धन्नाजी की गति कौन सी हुई
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Answer
जैन परंपरा के अनुसार पुण्यशाली शालीभद्र और श्रेष्ठिवर्य धन्यजी/धन्नाजी ने संयम मार्ग अपनाकर अंत में मोक्षगति प्राप्त की।Explanation
- शालीभद्र अत्यंत वैभवशाली थे, लेकिन उन्होंने संसार के सुखों को त्यागकर दीक्षा ली।
- श्रेष्ठिवर्य धन्नाजी भी वैराग्य धारण करके साधना के मार्ग पर चले।
- जैन धर्म में जब आत्मा सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र के साथ शुद्ध साधना पूर्ण करती है, तब वह मोक्ष को प्राप्त करती है।
Spiritual Understanding
इन दोनों महापुरुषों का जीवन यह संदेश देता है कि:- वैभव और सुख स्थायी नहीं हैं।
- सच्चा कल्याण त्याग, संयम और आत्मशुद्धि में है।
- संसारिक संपत्ति से नहीं, बल्कि कर्मों के क्षय से आत्मा मुक्त होती है।