यदि आप भरहेसर सज्झाय के महापुरुष वंकचूल की कथा की बात कर रहे हैं, तो जैन कथा के अनुसार वंकचूल मरकर 12वें देवलोक में देव बना — यानी देवगति में गया। ( jainmedia.in)
Explanation
कथा में बताया गया है कि उसने आचार्य भगवंत द्वारा दिए गए नियमों का दृढ़ता से पालन किया, और उसी पुण्य के फलस्वरूप उसे यह गति प्राप्त हुई। ( jainmedia.in)
Spiritual Understanding
जैन धर्म में नियम, संयम और आत्म-नियंत्रण का बहुत बड़ा महत्व है। वंकचूल की कथा यह सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और पालन से जीव ऊँची गति प्राप्त कर सकता है। ( jainmedia.in)
Takeaway
वंकचूल देवगति में, विशेषकर 12वें देवलोक में गया। ( jainmedia.in)