कथा के अनुसार कूर्मापुत्र ने अंत में मोक्ष प्राप्त किया, इसलिए वे सिद्धगति में गए। ( jainqq.org)
Explanation
कूर्मापुत्रचरित में बताया गया है कि कूर्मापुत्र ने केवलज्ञान प्राप्त किया, फिर अपने शेष कर्मों का क्षय करके मोक्ष पाया। जैन परंपरा में यह अंतिम अवस्था सिद्धगति कहलाती है। ( jainqq.org)
Takeaway
अर्थात, मातृ-पितृ भक्त कूर्मापुत्र का अंतिम फल मोक्ष / सिद्धगति माना गया है। ( jainqq.org)