जीरण सेठ की गति क्या हुई
Answer
जीर्ण सेठ की गति
बारहवें स्वर्ग में हुई। जैन कथा के अनुसार, उसकी आहारदान-भावना इतनी उच्च थी कि उसे 12वें देवलोक का पुण्य बंधा; और यदि देवदुंदुभि का विक्षेप न होता, तो वह आगे चलकर
केवलज्ञान तक भी पहुँच सकता था। (
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Explanation
कथा में जीर्ण सेठ भगवान महावीर के पारणे के दिन आहारदान देने की प्रतीक्षा कर रहा था। उसकी भावना बहुत शुद्ध और एकाग्र थी। उसी भावना के बल से उसे बहुत ऊँचा पुण्य मिला और उसका परिणाम 12वें स्वर्ग के रूप में बताया गया है। (
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Spiritual Understanding
यह कथा यह सिखाती है कि
शुद्ध भावना और
निःस्वार्थ दान का जैन धर्म में बहुत बड़ा महत्व है। बाहरी क्रिया के साथ-साथ अंतरंग भाव भी आत्मा की गति तय करता है। (
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Takeaway
जीर्ण सेठ की कथा का सार यह है:
भावना जितनी निर्मल, गति उतनी ऊँची। (
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