जैन परंपरा के अनुसार संयम-आराधक पुंडरीक मुनि की गति सर्वार्थसिद्ध विमान में देवगति हुई। उन्हें शुभ साधना और संयम के फलस्वरूप उस सर्वोच्च स्वर्गीय अवस्था में जन्म मिला। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
यह कथा बताती है कि जैन धर्म में भाव और सम्यक् आराधना का बहुत महत्व है; थोड़े समय का भी निष्कपट संयम महान फल दे सकता है। ( jainqq.org)
Takeaway
पुंडरीक मुनि की कथा संयम, समता और अंतःशुद्धि की महिमा सिखाती है।