मेघकुमार मुनि की गति “विजय” नामक अनुत्तर विमान में हुई थी, यानी उनकी अनुत्तर देवगति मानी जाती है. ( jainqq.org)
Explanation
जैन ग्रंथों में वर्णन है कि मेघकुमार मुनि ने संयम का पालन किया, संलेखना की, और देह त्याग के बाद विजय नामक अनुत्तर विमान में देव रूप में उत्पत्ति पाई. आगे उनका जीव महाविदेह क्षेत्र में जन्म लेकर मोक्ष की ओर जाएगा, ऐसा भी वर्णन मिलता है. ( jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में: मेघकुमार मुनि की गति = विजय अनुत्तर विमान. ( jainqq.org)